Monday, 11 April 2016

‘नीट’ के जरिये ही होंगे निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश

 अपने एक फैसले को वापस लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी मेडिकल कालेजों में दाखिले राष्ट्रीय योग्यता प्रवेश परीक्षा (नीट) के आधार पर होंगे। संविधान पीठ ने सोमवार को दिए अपने आदेश में कहा कि यह फैसला उचित नहीं था इस फैसले में न तो बहुमत के दृष्टिकोण पर विचार किया गया और न ही पीठ के सदस्यों के साथ विमर्श किया गया। इसलिए इस निर्णय पर पुनर्विचार का आदेश दिया जाता है और इसे वापस लिया जाता है।
इस आदेश का देशभर के 600 मेडिकल कालेजों पर असर होगा जो अपने टेस्ट के आधार पर मेडिकल कोर्सों में प्रवेश देते हैं। पूर्व के आदेश में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा था कि निजी मेडिकल कालेजों में प्रवेश नीट के जरिये करने की जरूरत नहीं है। इस पीठ में जस्टिस एआर दवे भी थे। ये कालेज ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों में प्रवेश अपने टेस्ट के आधार पर कर सकते हैं। पीठ का कहना था कि मेडिकल कौंसिल को नीट कराने का अधिकार नहीं है, यह सिर्फ मेडिकल शिक्षा का विनियमन ही कर सकती है। सोमवार को जस्टिस एआर दवे की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने 18 जुलाई 2013 का फैसला वापस लेते हुए कहा कि इस मामले में दोबारा से सुनवाई होगी। इस आदेश में निजी मेडिकल कालेजों को नीट के दायरे से बाहर कर दिया गया था। संविधान पीठ ने कहा कि पूर्व के फैसले में खामियां थी और इसमें बहुमत के दृष्टिकोण पर विचार नहीं किया गया और न ही स्थापित तथा बाध्यकारी नजीरों पर विचार हुआ। इसलिए हम इस फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका को स्वीकार करते हैं और 18 जुलाई 2013 को सुनाए गए फैसले को वापस लेते हें। साथ ही मामले का नए सिरे से सुनने के आदेश देते हैं। इस फैसले के खिलाफ मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया ने पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की थी। उसने कहा था कि टेस्ट कराने का मकसद मेरिट को जांचना है क्योंकि एमबीबीएस करने वाले छात्र डाक्टर बनते हैं जो लोगों को इलाज करते हैं।



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