Tuesday, 12 April 2016

महाराष्ट्र के 15 हजार गांव में गंभीर जलसंकट

 सूखे से जूझ रहे महाराष्ट्र के लातूर जिले के लिए पानी लेकर पहली ट्रेन मंगलवार सुबह यहां पहुंच गई। इस ट्रेन ने 350 किलोमीटर की दूरी 18 घंटे में तय की। हालांकि लोगों तक इसका पानी काफी देर से पहुंच पाएगा। पहले इस पानी को फिल्टर किया जाएगा। ट्रेन से कुल पांच लाख लीटर पानी भेजा गया है। लातूर में धारा 144 लागू है। इस बीच नेताओं में क्रेडिट लेने को होड़ मच गई है। मौजूदा समय में राज्य में करीब 15,000 गांव गंभीर जलसंकट से जूझ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश गांव लातूर, बीड और उस्मानाबाद जिले में आते हैं।

कुछ ऐसी है महाराष्ट्र की हालत
- महाराष्ट्र में साल 2016 में हर महीने करीब 90 किसानों ने सुसाइड किया।
- कई तालाबों और नदियों में पानी 4% से भी कम बचा है।
- लगातार चौथी बार महाराष्ट्र सूखे का सामना कर रहा है।
- सबसे ज्यादा असर औरंगाबाद, लातूर और विदर्भ के जिलों में देखने को मिल रहा है।

कहां-कहां हैं सूखे जैसे हालात?
- महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में नदी और डैम पूरी तरह से सूख चुके हैं।
- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी बेहाल।
- यूपी और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में बंदूकों के सहारे पानी की निगरानी की जा रही है।

सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद
 पिछले दो साल बरसात में कमी और सूखे जैसी स्थिति के बाद सरकार ने सोमवार को कहा कि इस वर्ष मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद है। उसने तथा राज्यों को निर्देश दिया कि वे जून से शुर होने वाली खरीफ सत्र में फसल का रकबा और उत्पादन बढ़ाने की योजना तैयार करे। कृषि सचिव शोभना के पटनायक ने वर्ष 2016.17 के लिए खरीफ अभियान को शुरू करने के लिए एक रारष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, अल नीनो (समुद्री सतह के तामान में बदलवा की घटना) के प्रभाव में गिरावट आ रही है। ऐसी उम्मीद है कि इसके बाद ‘ला नीना’ की स्थिति आयेगी और जिससे इस वर्ष मानसून बेहतर हो सकता है।

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