Wednesday, 23 July 2014

इजराइली अत्याचार पर खामोशी क्यों

आतंकी संगठन हमास के शासन वाले गाजा पट्टी में इजरायली सेना के हमले जारी हैं। हमास की ओर से भी झुकने के कोई संकेत नहीं हैं और वह इजरायली इलाकों में रॉकेट हमले जारी रखे है। दोनों ओर से खेले जा रहे इस खूनी खेल में अब तक 604 फलस्तीनी और 29 इजरायली अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। नागरिकों की मौतों के लिए इजरायली सेना ने हमास को जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की ओर से किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद युद्धविराम के कोई संकेत नहीं हैं। कहा जाता है कि 70 साल पहले फिलीस्तीनियों द्वारा किया गया त्याग आज उन्हीं के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। हिटलर द्वारा भगाए गए हजारों शरणार्थियों को पनाह देने वाला फिलीस्तीन आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। बीते दिनों इजराइल ने गाजा में कई रॉकेट दागे, जिससे कई बेगुनाह बेमौत मारे गए। आश्चर्य यह है कि इजराइल के जुल्म को दुनिया चुपचाप देख रही है। खासतौर पर वे देश भी, जो पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाने का वादा करते हैं। मेरा सवाल उनसे है कि अगर उनके देश पर भी हमला होता, तो क्या वे चुप बैठते? घोर दुर्भाग्य है कि एक तरफ, दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष वातानुकूलित कमरों में बैठकर अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का हल करने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ, एक राष्ट्र बरबादी के कगार पर पहुंच चुका है, जिसे देखने वाला कोई नहीं! यह और भी दुखद है कि पवित्र रमजान में माह में महिलाओं-छोटे बच्चों का कत्लेआम किया जा रहा है और दुनियाभर में इस नरसंहार पर कोई भी देश अपना मुंह नहीं खोल रहा। मानवीयता को शर्मसार करने वाले इस अभियान को इजराइल ने और तेज करने के लिए कहा है तो समझा जाना चाहिए कि वहां हालात कितने भयावह होंगे। अत: किसी देश के ऐसे उन्मादी कृत्य पर चुप्पी साधने की बजाए सभी को सामूहिक तौर पर इसका प्रतिकार करना चाहिए। मानवीय मामलों का समन्वय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन ओसीएचए की रिपोर्ट में 21 जुलाई की दोपहर तीन बजे से 22 जुलाई की दोपहर तीन बजे तक मारे गए बच्चों के आंकड़े दिए गए हैं। ओसीएचए के मुताबिक इस दौरान कुल 120 फलस्तीनी लोग मारे गए. इनमें 26 बच्चे और 15 महिलाएं थीं। संगठन के मुताबिक जुलाई के पहले हफ़्ते में गाजा में संघर्ष की शुरूआत होने के बाद से अब तक कुल 599 फलस्तीनी मारे गए हैं। इनमें से 443 आम लोग हैं। मरने वाले आम नागरिकों में 147 बच्चे और 74 महिलाएं शामिल हैं। इस संघर्ष में 28 इसराइली भी मारे गए हैं, जिनमें दो आम नागरिक और 26 सैनिक शामिल हैं। इस संघर्ष में 3504 फलस्तीनी घायल हुए हैं। इनमें 1,100 बच्चे और 1,153 महिलाएं शामिल हैं। इन आंकड़ों में उन मामलों को शामिल नहीं किया गया है, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

1 comment:

  1. इजराइल से बार-बार हार कर भी अरब देश तो फिर भी बचे रह सकते है,लेकिन अगर इजराइल एक बार ही हार गया तो उसके अस्तित्व का पता भी नहीं लग पाएगा। उसके पास जीतने के अलावा और कोई बिकल्प ही नहीं है। और इस सच्चाई को समझ कर ही इसराइल जीतने के जो भी प्रयास है सब कुछ कर रहा है। और ये भी समझना है की जितने भी इस्लामी राष्ट्र है सब को मन ही मन विश्वास है की इजराइल का सीमित संसाधन स्थिर जनसंख्या और छोटे से क्षेत्र फल, नगण्य अंतरराष्ट्रीय समर्थन के कारण एक न एक दिन इजराइल को हारना ही पड़ेगा । यहा तक हमास जैसे गुट को भी पता है की इजराइल के पास अपनी कोई स्थाई सेना नहीं है उस देश के नागरिक ही उसे अपनी जान से भी बढ़ कर चाहते है धन्य है ऐसे नागरिक पर उनकी इस मनोभाओ को हमारे उच्चवर्गीय भारतीय नहीं समझ पा रहे है।क्या हमे यह भूल जाना चाहिए की अपनी विशाल आबादी,संसाधन और मजहबी कट्टरता के कारण अनेक मुस्लिम देश इजराइल को समाप्त कर देना चाहते है। इन सब बातो को हम कैसे और किस रूप मे ढेख सकते है?

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