Thursday, 6 August 2015

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री दिखाएं नैतिकता


शिक्षक समाज का दर्पण होता है। शिक्षक छात्र को जिस सांचे में ढालता है, वैसे ही उस समाज का निर्माण होता है। किसी समाज के उत्थान और पतन का इतिहास उस समाज के शिक्षक ही तय किया करते हैं। अगर शिक्षक नैतिक विहीन हो जाए तो वह समाज कैसा होगा? शायद इसीलिए हमेशा से महापुरुषों ने नैतिकता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। अहम सवाल है कि शिक्षकों  का   नेतृत्व करने वाला शिक्षा मंत्री ही अगर नैतिक विहीन आचरण करे तो समाज की क्या दशा होगी। नयी पीढ़ी को आदर्शवान बनाने वाले शिक्षक की मनोदशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आदि जैसे कई सवाल खड़े होंगे। इन सारे सवालों को इसलिए उठा रहा हूं कि छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप को अपनी पत्नी के कारण नैतिकता की अग्निपरीक्षा में उतरना होगा। अगर वह इससे दूर भागते हैं तो समाज और राजनीति की नजरों में हमेशा के लिए गिर जाएंगे और नैतिकता के मानदंड पर खरे उतरते हैं तो हमेशा के लिए उदाहरण बन जाएंगे और उनका प्रकरण एक नजीर के रूप में पेश किया जाएगा। आइए हम उस पूरी घटना का जिक्र करते हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप की नैतिकता पर सवाल खड़ा हो गया है। केदार कश्यप बस्तर टाइगर के रुप में प्रसिद्ध रहे आदिवासी नेता बलीराम कश्यप के दूसरे बेटे हैं। बलीराम बस्तर क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक बार लोकसभा के सदस्य निर्वाचित रहे हैं। उनके निधन के बाद उस सीट पर वर्तमान में बलीराम के बड़े बेटे दिनेश कश्यप सांसद हैं। दिनेश के ही छोटे भाई केदार कश्यप छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री है। कश्यप बंधुओं का छत्तीसगढ़ सरकार में खासा प्रभाव है। केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी की एमए (अंग्रेजी) फाइनल ईयर की छात्रा हैं। वह जगदलपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित लोहंडीगुडा में बने परीक्षा केन्द्र पर परीक्षार्थिनी के रूप में शामिल हैं। 4 अगस्त 2015 को द्वितीय पाली में (2 से 5 बजे) अंग्रेजी विषय का अंतिम प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। केदार कश्यप की पत्नी के रोल नंबर 66863 को कंक्ष क्रमांक 10 में सीट आवंटित हुई थी। परीक्षा के दौरान इस सीट पर किरण मौर्य नाम की महिला परीक्षा देती पायी गयी। किरण मौर्य के पास से शांति कश्यप के नाम से जारी प्रवेश पत्र पाया गया। इस प्रवेश पत्र पर शांति कश्यप की फोटो लगी थी। इतना ही नहीं किरण मौर्य पूछताछ में खुद को यह सबित करने की कोशिश कर रही थीं कि वह ही केदार कश्यप की पत्नी हैं। पर जांच पड़ताल में मामला खुलकर सामने आ गया। स्पष्ट रूप से कहा जाय तो सच यह है कि शिक्षा मंत्री की पत्नी होने का लाभ उठाकर शांति कश्यप ने अपने स्थान पर दूसरी महिला को परीक्षा देने के लिए बैठा रखा था। इस कार्य में निश्चित रुप से परीक्षा संचालन सामिति और केन्द्र व्यवस्थापक का भी सह प्राप्त है। अगर ऐसा न होता तो शिक्षा मंत्री की पत्नी के स्थान पर कोई दूसरी महिला परीक्षा देने कैसे बैठ जाती है। पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति वंश गोपाल सिंह ने शांति कश्यप को परीक्षा के लिए अपात्र घोषित कर दिया है। इसके बाद शिक्षा मंत्री केदार कश्यप का बयान आया कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उनकी पत्नी परीक्षा दे रही हैं। ऐसा कैसे संभव है। साफ है कि प्रकरण उजागर होने के बाद शिक्षा मंत्री अपना बचाव कर रहे हैं। क्या शिक्षा मंत्री जैसे महत्पूर्ण पद पर बैठे लोगों का आचरण ऐसा होना चाहिए। केन्द्र में यूपीए-1 की सरकार थी। उस समय तत्कालीन केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री रहे शशि थरुर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था, उनके ऊपर सिर्फ यह आरोप लगा था कि उनकी पत्नी सुनंद पुष्कर ने आईपीएल फ्रेंचाइजी के शेयरों में अनुचित लाभ प्राप्त किया है। यूपीए-1 में ही कानून मंत्री रहे सलमान खुर्शीद की पत्नी लुइस खुर्शीद पर आरोप लगा था कि उनके एनजीओ को विकलांगों के नाम पर मिले सरकारी धन में हेराफेरी की गई है। इस आरोप के बाद सलमान खुर्शीद को कानून मंत्रालय से हटाकर विदेश मंत्रालय का मंत्री बना दिया गया था। अब चाहे छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री यह जानते हों कि उनकी पत्नी परीक्षा दे रही थी या फिर इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। यह कहने से कोई फायदा नहीं है। अब तो उन्हें अपनी नैतिकता का प्रदर्शन करना चाहिए। इस बात का निर्णय केदार कश्यप स्वयं करे कि ऐसी दशा में समाज के सामने उन्हें क्या सफाई देनी है और खुद को कैसे दंडित करना है। अंत में सिर्फ इतना और बात खत्म-
मै ही खुद ही गुनहगार हूँ
अपनी बरबादियों का
न मै मोहब्बत करता न वो बेवफा होती