Monday, 1 February 2016

गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि राजव्यवस्था का शोकगीत

गांधी जी के अनुसार, 'भू-मण्डल पर हमारा देश सबसे अधिक गरीब है और आजाद भारत के जन-प्रतिनिधि ऐसे ढंग और तौर-तरीकों से रहने का साहस नहीं कर सकते जो उनके निर्वाचकों के रहन-सहन से मेल ना खाता हो।' इन सबसे परे राजनेता विदेश में गुप्त रूप से छुट्टी मनाने जाते हैं और गांवों में रात्रिवास का मीडियानामा पढ़ा जाता है। बुन्देलखण्ड में बदहाल गांवों वाले उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा सैफई में सैकड़ो करोड़ रुपये खर्च कर हवाई जहाज के लिए रनवे का निर्माण किया गया जिस पर अब नाईट लैण्डिंग की भी सुविधा की जा रही है। लाखों गांवों की बदहाली की अनदेखी कर स्मार्ट सिटी के रनवे की रौनक में उड़ान भरने वाले जनप्रतिनिधियों का गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दरअसल राजव्यवस्था का शोकगीत है। गांधीजी की पुण्यतिथि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्मरण स्वाभाविक है, जिन्होंने जुलाई 1944 में रेडियो रंगून से गांधी को राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित किया था। अब आज़ादी के नायक सुभाष, बंगाल में सत्ता की राजनीति के मोहरे ही बन गए हैं। आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को बंगाल के मन्त्रियों से मिलने पर गांधीजी ने कहा था कि 'सत्ता पाने पर वे वैभव के जाल में ना फंसे क्योंकि उन्हें गांवों और गरीबों का उद्धार करना है।' आजादी के 68 वर्ष पश्चात् देश के 1 फीसदी अमीरों का 53 फीसदी सम्पत्ति के साथ उद्धार हुआ है और हाशिए के 50 फीसदी लोग 4.1 फीसदी सम्पत्ति के साथ लाचारी की जिन्दगी जी रहे हैं। सांसद लोग गांव और गरीब की तस्वीर भले ही ना बदल सके हों, पर 2004 से 2009 के पांच साल के दौरान 304 सांसदों की सम्पत्ति में 300 फीसदी का इजाफा ज़रूर हो गया। गांधीजी ने कहा था, 'मंत्री पद तो सेवा का द्वार है और नेताओं को एक-एक पाई बचाना चाहिए।' आज के भारत में गांधी के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं के लिए चार्टर्ड विमानों का बेड़ा तथा सुरक्षा के नाम पर हजारों करोड़ खर्च किये जा रहे हैं। गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों की अनदेखी कर विधानसभा-संसद में हिंसा करने वाले जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर विफल होने पर भी अपने वेतन और भत्तों में बेइंतहा इजाफा कर रहे हैं। आईआईएम द्वारा वर्ष 2014 में किये गये अध्ययन के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल देश में सर्वाधिक वेतन पाने वाले मुख्यमंत्री हैं। आम जनता की भलाई के नाम पर दिल्ली में सरकार बनाने वाली 'आप' सरकार ने विधायकों के वेतन भत्तों में चार गुना तक वृद्धि का प्रस्ताव पारित किया है जिससे वे देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले विधायक हो जायेंगे। 88,500 रुपये सालाना प्रति व्यक्ति आय वाले देश में, दिल्ली के विधायक लगभग 3.2 लाख रुपये का मासिक वेतन और भत्ते लेंगे और उस दौड़ में अब संसद सदस्य भी शामिल हो गए हैं। गांधी के नाम पर सरकार बनाने वाले राजनेता जनता की सेवा में विफल होने के बावजूद आजीवन भारी भरकम पेंशन का इंतजाम करके राजनीतिक सत्ता का लाभ लेते रहते हैं। बाहुबलियों का तंत्र जो सत्ता-संस्थानों में शीर्ष पर काबिज है, वही पंचायती राज के नाम पर संसाधनों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश में जुट गया है। इससे गांधी के ग्राम स्वराज की अवधारणा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है जिसका मर्सिया स्मार्ट सिटी में लिखे जाने की प्रस्तावना बन रही है।