Monday, 30 March 2015

‘आप’ तो ऐसे ना थे जनाब

दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद ने जितने नारे दिए आज वो सब ’जुमले’ साबित हो रहे हैं। आप के नारे  उलटा उसी पर तंज कस रहे हैं। दूसरी पार्टियों के जिस ‘राजनीतिक चरित्र’ पर आप हमला करती रही वे सब आज आम आदमी पार्टी पर फिट हो रहे हैं। सरकार बनाने के दो महीनों के भीतर ही आप में जो घमासान मचा है वह न केवल जनता के लिए बल्कि आप को दूर से ही समर्थन दे रहे लोगों को भी ठेस पहुंचाने वाला है। जो अरविंद केजरीवाल दूसरी पार्टी के नेताओं को मंचों से डिबेट के लिए ललकारते थे वो आज मीडिया से दूरी बना रहे हैं। पार्टी के भीतर-बाहर इतना हो-हल्ला मचता रहा लेकिन अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के सामने आकर एक बार भी इस मसले पर सही तरीके से प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं समझी। रविवार को हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास का हटा दिया गया। एक दिन पहले शनिवार को हुई नेशनल काउंसिल की बैठक के बाद स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि अब पूरे विवाद पर किसी की सफाई की जरूरत तक नहीं बची है। लोकपाल का बैनर लिए जो आम आदमी पार्टी राजनीति में आई आज वह खुद ही अपनी पार्टी के आंतरिक लोकपाल को भूल गई। योगेंद्र यादव का कहना है कि आप नेताओं ने नेशनल काउंसिल की बैठक में आंतरिक लोकपाल रामदास को नहीं आने दिया। क्या पार्टी का इतनी जल्दी लोकपाल की अवधारणा से भरोसा उठ गया। आंतरिक लोकतंत्र की दुहाई देने वाली आम आदमी पार्टी का तानाशाही रवैया भी जनता के सामने खुलकर आ गया। ‘इंसान का हो इंसान से भाईचारा’ गीत गाने वाले केजरीवाल की पार्टी का ‘भाईचारा’ भी जनता से खूब देखा। बैठक और पार्टी के आंतरिक मसलों पर जनता से राय मांगने का दिखावा करने वाली आम आदमी पार्टी ने आखिर क्यों आज टीवी समाचार चैनलों के प्रतिनिधियों को बैठकस्थल के भीतर नहीं जाने दिया। बेहतर होता कि आज जनता देखती कि आखिर किस प्रक्रिया के तहत पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने जितने संगीन आरोप अरविंद केजरीवाल और उनके गुट के नेताओं पर लगाए हैं, अगर वे सच साबित होते हैं तो यह न केवल आप कार्यकर्तार्ओं के साथ बल्कि दिल्ली और देश की उस जनता के साथ बड़ा धोखा होगा जिसने आप के उदय को ‘नई किस्म की राजनीति’ की शुरूआत समझा था। आम आदमी पार्टी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस संकट से कैसे उबर पाती है और जनता के भरोसे का टूटने से कैसे बचाती है।

Saturday, 21 March 2015

बुलेट ट्रेन के सपने से पहले बदहाल ‘सूरत’ बदलनी होगी

प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी ने देश के लोगों को बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया। युवा पीढ़ी के लिए यह खुशी की बात रही। चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी के मन में यह कसक दिखाई दे रही थी कि वह जैसे ही प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर आसीन होंगे, वैसे ही देश की सड़ी-गली व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन दिखने लगेगा। यह सपना सच भी हो सकता है, या फिर केवल सपना ही बनकर रह सकता है। इसके लिए अभी कुछ वक्त का इंतजार है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दस माह का समय धीरे-धीरे गुजर गया। उन्होंने अपनी पहली सरकार का आम बजट और रेल बजट भी संसद में पेश कर दिया। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान नरेन्द्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में सदानंद गौड़ा को रेल मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी, पर कुछ महीने के बाद ही उन्होंने सदानंद गौड़ा से रेल मंत्रालय वापस लेकर अपने भरोसेमंद साथी सुरेश प्रभु को रेल मंत्री बना दिया। प्रधानमंत्री ने सुरेश प्रभु की खूब तारीफ भी की थी। ऐसा लगा था कि सुरेश प्रभु कुछ ऐसा करेंगे कि रेलवे की पुरानी व्यवस्थाओं में व्यावहारिक बदलाव होगा और सामयिक परिवर्तन हो सकेगा। रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती रेलगाड़ियों को दुर्घटना से बचाना है। दूसरी चुनौती रेल में यात्रा कर रहे यात्रियों को सुरक्षित उनके गन्तव्य तक पहुंचाना है। पर इन दोनों चुनौतियों का सामना कर पाने में सुरेश प्रभु कहीं न कहीं फेल साबित हो रहे हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी अगर जिम्मेदार ठहराया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए। 26 मई 2016 को नरेन्द्र मोदी जिस दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, उसी दिन उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में दिल्ली गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस हादसे में 30 यात्रियों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके बाद महीने भर का भी समय नहीं व्यतीत हुआ था कि 25 जून 2014 को बिहार के छपरा के पास डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में भी पांच लोगों की मौत हुई थी। एक अक्टूबर 2014 को फिर उत्तर प्रदेश में गोरखपुर जिले के पास कृषक एक्सप्रेस और लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो गई। टक्कर में 12 लोग मारे गए और 45 लोग घायल हुए। 16 दिसंबर 2014 को बिहार में नवादा जिले के वारिसअलीगंज रेलवे स्टेशन के समीप एक मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर एक एक्सप्रेस ट्रेन से एक बोलेरो की टक्कर हो गई। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए। 13 फरवरी 2015 को बेंगलुरु से एर्नाकुलम जा रही एक एक्सप्रेस ट्रेन की आठ बोगियां होसुर के समीप पटरी से उतर गईं। इसमें दस लोगों की मौत हो गयी व 150 यात्री घायल हो गए। 16 मार्च 2015 को दिल्ली से चेन्नई जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस के एक डिब्बे में नेल्लोर के समीप शॉर्ट सर्किट होने की वजह से आग लग गयी, इस हादसे में कम से कम 47 यात्रियों की जल कर मौत हो गई थी।  28 यात्री बुरी तरह झुलस गये थे। डिब्बे में शौचालय के समीप शॉर्ट सर्किट हुआ था। 20 मार्च 2015 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में बछरावां रेलवे स्टेशन के निकट देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस ब्रेक फेल हो जाने से पटरी से उतर गई। इस हादसे में 40 से अधिक यात्रियों की मौत हो गयी और 150 से अधिक लोग घायल हो गए। यह केवल वह घटनाएं हैं, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में घटित हुई हैं। दूसरी चुनौती के रुप में यात्रियों को गन्तव्य तक सुरक्षित यात्रा करा पाने में भी रेलवे पूरी तरह से नाकाम नजर आ रहा है। 2 जून 2014 को ऊधमसिंह नगर जिले में मनचले युवकों ने तीन छात्राओं से छेड़छाड़ की। एक छात्रा के भाई ने इसका विरोध किया तो मनचलों ने उसका सिर फोड़ दिया। इस पर एक छात्रा ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया। 3 जून 2014 को उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में लालकुआं बरेली पैसेन्जर ट्रेन में यात्रा कर रही तीन छात्राओं का अपहरण करने की कोशिश की गई। छात्राओं ने इसका प्रतिरोध किया तो बदमाशों ने एक छात्रा को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। 28 जून 2014 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में गया-मुगलसराय रेलखंड पर अनुग्रह नारायण रोड व फेसर स्टेशन के बीच इंटर की एक छात्रा के साथ बदमाशों ने लूट करने की कोशिश की। उसने इसका विरोध किया तो बदमाशों ने उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। 19 नवंबर 2014 को कानपुर की रहने वाली छात्रा ऋतु त्रिपाठी दिल्ली से मालवा एक्सप्रेस की स्लीपर कोच एस-7 पर सवार होकर महाकाल बाबा का दर्शन करने के लिए उज्जैन जा रही थी। रात में करीब दो बजे बदमाशों ने ऋतु का पर्स लेकर भागने की कोशिश की। इसका आभास होने पर ऋतु ने विरोध किया तो बदमाशों ने उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। उत्तर  प्रदेश के बरेली जिले में ही लालकुआं-बरेली पैसेन्जर ट्रेन में 24 फरवरी 2015 को फिर बदमाशों ने बैंककर्मी मनप्रीत के साथ लूट की कोशिश की। उन्होंने इसका विरोध किया तो बदमाशों ने डंडे से प्रहार कर उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। 18 मार्च 2015 को जबलपुर निजामुद्दीन एक्सप्रेस के एसी कोच में सफर कर रहे मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया और उनकी पत्नी सुधा मलैया को मथुरा के पास बदमाशों ने चलती ट्रेन पर लूट लिया। सुधा मलैया ने इस बात की शिकायत खुद रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मिलकर की थी। इसके एक दिन पहले छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में भी बदमाशों ने लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था। 19 मार्च 2015 की रात विशाखापट्टनम एक्सप्रेस ट्रेन पर यात्रा कर रहीं सुनीता जैन मध्य प्रदेश के उमरिया स्टेशन से पहले लूटेरों का शिकार हो गर्इं। घटना रात 11 बजे ही है बैग लेकर भाग रहे बदमाशों का उन्होंने पीछा किया तो बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। मैंने उन्हीं घटनाओं को जिक्र किया है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में ही हुई हैं। ट्रेनों में लगातार घट रही इस तरह की घटनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश में सुशासन लाने के नारे को मुंह चिढ़ा रही हैं। इस घटनाओं को रोका जा सकता है, बशर्ते इसके लिए महज भाषणबाजी करने के बजाय कुछ काम किया जाए। रेल मंत्री सुरेश प्रभु में यह इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती है। रेल मंत्री बेशक अच्छी योजनाएं तैयार कर सकते हैं। रेलवे को रुपए से मालामाल कर सकते हैं, पर इस बदहाल सूरत को सुधारने में एक कदम भी वह सफल नजर नहीं आ रहे हैं। सोचिए उन परिवार के सदस्यों की क्या हालत होगी, जिनके घर के लोग ट्रेन हादसे का शिकार हो जाते हैं। देश में बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहल करके रेलवे की इस बदहाल सूरत के साथ ही उसकी सीरत भी बदलनी होगी।
                                                    

Sunday, 15 March 2015

अखिलेश सरकार का न कोई ‘विजन’ न विकास की ‘मंशा’

15 मार्च 2015 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार के तीन वर्ष पूरे हो गए। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब दो वर्ष से कम का समय शेष रह गया है। अखिलेश यादव की सरकार की तीसरी वर्षगांठ का यह दिन उत्तर प्रदेश की इन वर्षों में विकास यात्रा का अवलोकन करने का सर्वोत्तम दिन है। इस सरकार के पिछले तीन वर्ष के कामकाज पर नजर डाले तो इस सरकार का न तो कोई ‘विजन’ दिखाई देता है और न ही प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने की कोई मंशा नजर आती है। अगर कुछ दिखता है तो बस अराजकता, मनमानीपन, महत्वपूर्ण पदों पर अपनों को बैठाने की कोशिश, जातीयता का जहर पैदा करना। इससे इतर कुछ भी नजर नहीं आता है। वर्ष 2012 में 15 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अखिलेश यादव की कैबिनेट की पहली बैठक में ही विधायकों को लक्जरी वाहन खरीदने के लिए विधायक निधि से 25 लाख रुपए दिए जाने का फैसला लिया गया था। इस फैसले की आलोचना हुई तो निर्णय को वापस ले लिया गया। दूसरी कैबिनेट की बैठक हुई तो महानगरों और शहरों में शाम सात से रात 11 बजे तक विद्युत कटौती का फरमान जारी कर दिया गया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि इस अवधि में बिजली का सर्वाधिक खपत होती है। व्यापारियों ने जब तर्क दिया कि इसी अवधि में उनका सर्वाधिक कारोबार होता है तो फिर फरमान वापस ले लिया गया। 2012 में चुनाव के दौरान बेरोजगारी भत्ता, इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्रों को लैपटॉप और हाईस्कूल उत्तीर्ण छात्रों को टैबलेट दिए जाने की घोषणा की  गई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब दो साल तक अखिलेश यादव कूद-कूद कर विभिन्न जिलों में भव्य समारोहों में पहुंचकर लैपटॉप का वितरण करते रहे। लोकसभा चुनाव में जब पूरे उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के पांच सांसद जीतकर आए तो सरकार ने इस योजना को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। लैपटॉप वितरण के लिए आयोजित किए जाने वाले समारोहों में ही करोड़ों रुपए बेवजह खर्च कर दिए गए। इन सब घटनाओं का जिक्र इसलिए करना जरुरी है कि आपकी जेहन में यह बात साफ हो जाए कि इस सरकार को कोई ऐसा ‘विजन’ और ‘डिसीजन’ नहीं दिखाई देता, जिससे उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर एक कदम भी आगे बढ़ सके। अब हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से साम्प्रदायिक दंगे की शुरुआत हुई। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से होती हुई साम्प्रदायिक दंगे की आग ने मुजफ्फरनगर में ऐसा वीभत्स रुप धारण कर लिया कि सैकड़ों निर्दोष लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी। मां और बहनों की आबरु लूटी गयी। यह घटनाएं उस जिले में हुई, जहां के प्रभारी मंत्री मुलायम सिंह यादव को अपना सबसे बड़ा सरपरस्त मानने वाले आजम खान हैं। इतनी बड़ी घटना के बाद भी आजम खान की शान में कोई कमी नहीं आयी। शायद आजम खान के स्थान पर मुजफ्फरनगर को कोई और मंत्री रहा होता और ऐसी घटना घटती तो सबसे पहले उसे मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया जाता। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि दो मंत्री अखिलेश सरकार की कैबिनेट से बर्खास्त किए गए हैं। एक तो मरहूम राजाराम पाण्डेय जी रहे, जिनके ऊपर सिर्फ इस बात का इल्जाम था कि उन्होंने एक महिला मुलाजिम की खूबसूरती की भरी सभा में तारीफ कर दी थी। दूसरे हैं फैजाबाद मिस्टर तेज नारायाण उर्फ पवन कुमार पाण्डेय जो खुद को अखिलेश यादव का बालसखा बताते हैं। पवन पाण्डेय ने ही दो साल पहले लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यालय में ब्राह्मण सम्मेलन कराया था। पवन पाण्डेय पर भी महज इस बात का इल्जाम है कि उन्होंने किसी सरकारी मुलाजिम से जोर जबरदस्ती की। उत्तर प्रदेश के ही प्रतापगढ़ जिले में डिप्टी एसपी जियाउल हक की एक प्रधान की हत्या के बाद भड़के आक्रोश में भीड़ ने हत्या कर दी तो उसका इल्जाम अखिलेश कैबिनेट के मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भइया’ पर मढ़ दिया गया। इसके बाद राजा भइया ने खुद मंत्री पद छोड़ दिया। मामले की सीबीआई जांच हुई और राजा भइया निर्दोष साबित हुए। बंदायू में दो दलित बालिकाओं को शव पेड़ से लटका हुआ पाया गया। इस मामले में राज्य सरकार की जांच एजेसिंयों ने अलग-अलग रिपोर्ट दी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निदेशक को ही बेसिक शिक्षा विभाग के भी निदेशक का कार्यभार दे दिया गया। नियमत: एक व्यक्ति को ऐसे महत्व के दो पदों का काम नहीं सौंपा जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की, फिर भी राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ा। लोकसेवा आयोग में नियुक्तियों में एक वर्ग विशेष के अभ्यर्थियों के चयन का मामला अभी तक गूंज रहा है। पुलिस के तो न जाने कितने अधिकारियों की हत्या कर दी गर्इं। मथुरा और प्रतापगढ़ में शिक्षकों की हत्या किए जाने का भी मामला सामने आया। इलाहाबाद में सीजेएम कोर्ट परिसर में एक अधिवक्ता की पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोरखपुर के एसएसपी पर वहां से समाजवादी पार्टी के विधानपरिषद सदस्य ही पैसा लेकर लोगों की हत्या करवाने का इल्जाम लगा रहे हैं। यह मामला उन्होंने सदन में भी उठाया। यह सब बातें तो दीगर हैं, खुद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ही राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते रहते हैं और मंत्रियों को भी यह संदेश देते रहते हैं कि वह लोग सही कार्य नहीं कर रहे हैं। प्रदेश भर की सड़ों की दशा दयनीय है। तीन साल से न तो सड़कों की मरम्मत हो पा रही है और न ही नई सड़कों का निर्माण हो पा रहा है। नहरों में पानी नहीं आया। क्रय केन्द्रों पर किसान अपनी उपज को नहीं बेंच सके। इसके बावजूद भी यह सरकार खुद को जलकल्याणकारी बताती रही। सैफई में कौन-कौन से और किस तरह के आयोजन हुए मैं इसका जिक्र करना नहीं चाहता। ऊपर जिन-जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, उतने से ही आप यह समझ गए होंगे कि उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार सही मायने में किस मिशन पर काम कर रही है।

Saturday, 14 March 2015

‘मेक इन’ व ‘स्किल्ड इंडिया’ की परिकल्पना साकार करेगा छत्तीसगढ़ का बजट

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने 13 मार्च 2015 को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए बजट पेश किया। बजट में पूंजीगत व्यय में 39 प्रतिशत वृद्धि की गई है। बजट में युवा, अधोसंरचना विकास एवं औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई है। बजट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक-इन-इंडिया तथा स्किल्ड इंडिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस पहल की गई है। अधोसंरचना के विकास से इन्वेस्टर्स सेंटिमेंट तथा औद्योगिक विकास को ऊर्जा मिलेगी एवं भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने के लिए युवाओं के कौशल उन्नयन को विशेष महत्व मिलेगा। इस बजट के साथ पहली बार ‘यूथ बजट’ प्रस्तुत किया गया है। युवाओं के विकास के लिए बजट में कुल 6 हजार 151 करोड़ आवंटित किया गया है, जो कि कुल आयोजना व्यय का 16 प्रतिशत है। युवाओं को कौशल उन्नयन के अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए अब तक का सर्वाधिक 735 करोड़ रुपए का प्रावधान है। राज्य में इस साल 17 नये आईटीआई तथा 3 पॉलीटेक्निक खोले जाएंगे। युवा समग्र विकास योजना चालू कर आईटीआई, तकनीकी विश्वविद्यालय व व्यापम की प्रवेश परीक्षाओं के परीक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी और आईटीआई की फीस में भी 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इस बजट में अधोसंरचना के विकास पर सर्वाधिक 11 हजार करोड़ का प्रावधान है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में रोड नेटवर्क के उन्नयन के लिए 5 हजार 183 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य राजमार्ग तथा सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाली सड़कों को डबल लेन में उन्नयन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप मोड से 2 हजार किमी लंबाई की सड़कों का भी उन्नयन किया जाएगा, जिस पर 3 वर्ष में 10 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण सड़कों के विकास हेतु 700 करोड़ आबंटित किया गया है। लगभग 5 हजार करोड़ के निवेश से 300 किमी के रेल कॉरीडोर का विकास किया जाएगा। रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मापदंड के अनुरूप बनाया जाएगा। औद्योगिक विकास में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद््देश्य से नई औद्योगिक नीति तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी नीति लागू की गई है। नया रायपुर में इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा के लिए ट्रिपल आईटी प्रारम्भ कर दिया जाएगा। 17 जिला मुख्यालय में हाईटेक बस स्टैंड का निर्माण किया जाएगा। खाद्य एवं पोषण सुरक्षा हेतु लगभग 5 हजार करोड़ का प्रावधान है। कृषि बजट के लिए 10 हजार 700 करोड़ आबंटित है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। सिंचाई क्षमता के विस्तार हेतु विशेष महत्व दिया गया है एवं इस हेतु 2 हजार 700 करोड़ आबंटित है। निराश्रित पेंशन राशि में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, गत वर्ष भी इतनी ही वृद्धि की गई थी। इससे 16 लाख पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। प्रदेश के टीबी मरीजों को ईलाज के साथ-साथ पूरक पोषण की अभिनव योजना लागू की जाएगी। ऐसा करने में छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा। बच्चों में डायबिटीज के बढ़ते हुए प्रसार को देखते हुए मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना प्रारम्भ की जाएगी। शहरी क्षेत्र में स्लम एरिया में सुलभ शौचालय तथा व्यक्तिगत शौचालय हेतु 100 करोड़ का प्रावधान है। रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग में कामकाजी महिलाओं के लिए 15 करोड़ की लागत से महिला हॉस्टल प्रारम्भ किए जाएंगे। बालिकाओं में उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा विस्तार हेतु 4 हजार सीटों के 80 छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। ट्रायबल सबप्लान के लिए 36 प्रतिशत आयोजना व्यय प्रावधानित है, जबकि जनसंख्या का अनुपात 32 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में 11 आई.टी.आई. तथा 1 पॉलीटेक्निक खोले जाएंगे।  इन क्षेत्रों में 100 हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी स्कूल भवन तथा 50 कन्या छात्रावास निर्माण किए जाएंगे। आश्रम छात्रवृत्ति 750 से बढ़ाकर 800 रुपए तथा भोजन सहायक राशि 400 से बढ़ाकर 500 रुपए की जाएगी। 1 करोड़ तक वार्षिक बिक्री वाले छोटे एवं मध्यम व्यवसाइयों को त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत करने से मुक्ति। मंदी से राज्य के आयरन-स्टील उद्योगों को राहत देने के लिये रि-रोल्ड उत्पाद पर वैट की दर 5 से घटाकर 4 प्रतिशत किया गया है। सूक्ष्म तथा लघु उद्योगों को राहत देने के लिये प्रवेश कर से छूट हेतु पंूजी विनियोजन की सीमा रुपये 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ किए गए हैं। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बायो-टायलेट पर प्रचलित 14 प्रतिशत वैट तथा प्रवेश कर समाप्त कर दिया गया है। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत निर्मित होने वाले आवास निर्माण में उपयोग हेतु प्री-कास्ट, प्री-फैब्रीकेटेड, मोनोलिथिक कांक्रीट निर्माण पर वैट तथा प्रवेश कर समाप्त कर दिया गया है। एविएशन टरबाईन फ्यूल पर वैट की दर 5 से घटाकर 4 प्रतिशत कर दी गई है। वर्ष 2014-15 के लिए प्रचलित भाव पर छत्तीसगढ़ की आर्थिक विकास दर 13.20 प्रतिशत अनुमानित की गई है। इसी अवधि में देश की विकास दर 11.59 प्रतिशत अनुमानित है। कृषि क्षेत्र में विकास दर 14.18 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 10.62 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र में 15.21 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना जताई गई है। किसानों के लिए सूक्ष्म सिंचाई योजना को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-30 करोड़, ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण-158 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए युवा क्षमता विकास योजना तैयार की गई है। कौशल उन्नयन कार्यक्रमों के लिए 735 करोड़ दिए गए हैं। दुर्ग में नवीन विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। बस्तर, कांकेर, रायपुर, दुर्ग तथा राजनांदगांव में आदर्श आवासीय महाविद्यालय की स्थापना कराई जाएगी। 36 महाविद्यालयों में नवीन स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जायेंगे। अंबिकापुर तथा राजनांदगांव चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 79 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। महाविद्यालयों में नि:शुल्क वाईफाई सुविधा प्रदान की जाएगी।